धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदते हैं? अर्थ, नियम और शुभ समय 2026

धनतेरस पर झाड़ू इसलिए खरीदी जाती है क्योंकि लोक-परम्परा में वह घर से दरिद्रता और मलिनता को बाहर करने का साधन है, और जहाँ स्वच्छता है वहीं माँ लक्ष्मी का वास माना गया है। 2026 में धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर को है; झाड़ू खरीदने के लिए दिल्ली में 12:04–13:26 का शुभ चौघड़िया सबसे सुगम है, और 10:42–12:04 का राहुकाल टालना चाहिए।

एक नज़र में

धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर 2026
त्रयोदशी आरम्भ6 नवंबर 10:31
श्रेष्ठ खरीद समय (दिल्ली)12:04–13:26 (शुभ चौघड़िया)
रात का विकल्प20:48–22:26 (लाभ चौघड़िया)
राहुकाल (टालें)10:42–12:04

झाड़ू और माँ लक्ष्मी: प्रतीक का अर्थ

भारतीय घरों में झाड़ू केवल सफ़ाई का सामान नहीं है। लोक-मान्यता में इसे घर की लक्ष्मी का रक्षक माना जाता है, क्योंकि यही वह साधन है जिससे धूल, कूड़ा और अंधेरे कोने रोज़ साफ़ होते हैं। पुराणों में माँ लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी (दरिद्रता) का वर्णन है, जो गंदगी, कलह और आलस्य वाले स्थान पर रहती हैं। इसलिए झाड़ू को दरिद्रता को बाहर करने वाला उपकरण समझा गया।

दीपावली से पहले घर की पूरी सफ़ाई होती है और धनतेरस इस पंच-दिवसीय पर्व का पहला दिन है। इसी दिन नई झाड़ू लाना एक सुंदर संकेत है: हम माँ लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी कर रहे हैं। यह परम्परा किसी एक ग्रन्थ के विधान से कम, और पीढ़ियों के गृहस्थ-अनुभव से अधिक जुड़ी है। इसलिए इस लेख में जो नियम बताए गए हैं, उन्हें हम ईमानदारी से लोक-मान्यता कह रहे हैं।

2026 में झाड़ू कब खरीदें

धनतेरस का शुभ फल त्रयोदशी तिथि में माना जाता है। 6 नवंबर को त्रयोदशी 10:31 पर आरम्भ हो रही है, इसलिए उससे पहले का समय द्वादशी है। नीचे नई दिल्ली के समय हैं।

समयचौघड़िया / कालसुझाव
07:58–09:20लाभद्वादशी में; केवल आवश्यकता हो तो
09:20–10:42अमृत10:31 के बाद का भाग त्रयोदशी में
10:42–12:04राहुकालखरीदारी टालें
12:04–13:26शुभश्रेष्ठ समय
18:03–19:58पूजा मुहूर्तइस समय पूजा करें, खरीदारी नहीं
20:48–22:26लाभपूजा के बाद

शुक्रवार 6 नवंबर 2026, नई दिल्ली। स्रोत: आरती संग्रह पंचांग-गणना।

यदि आप सुबह ही बाज़ार जा पा रहे हैं, तो 10:31 के बाद और 10:42 से पहले का थोड़ा-सा अमृत भाग भी त्रयोदशी में है, पर समय बहुत कम है। सबसे सरल है दोपहर 12:04 के बाद खरीदना।

कैसी झाड़ू चुनें

  • सींक या फूल वाली प्राकृतिक झाड़ू परम्परा में सबसे अधिक पसंद की जाती है। प्लास्टिक की झाड़ू भी चल सकती है; भाव प्रधान है।
  • बँधी हुई, मज़बूत और साफ़ झाड़ू लें, जिसकी सींकें टूटी या बिखरी न हों।
  • कई परिवार विषम संख्या (एक या तीन) में झाड़ू लाते हैं। यह लोक-मान्यता है; एक झाड़ू पर्याप्त है।
  • मोल-भाव शालीनता से करें; झाड़ू बेचने वाले छोटे विक्रेता से खरीदना भी किसी के घर लक्ष्मी पहुँचाना है।
  • बहुत महँगी या सजावटी झाड़ू की आवश्यकता नहीं। जो रोज़ काम आए, वही असली शुभ है।

घर लाकर क्या करें, कहाँ रखें

  1. घर लाकर झाड़ू के हत्थे पर रोली या हल्दी से छोटा-सा तिलक लगाएँ, या सफ़ेद धागा बाँधें। कई घरों में यह लोक-मान्यता है।
  2. शाम की पूजा में माँ लक्ष्मी से घर की स्वच्छता और सुख की प्रार्थना करें; झाड़ू को पूजा-स्थान पर रखने की आवश्यकता नहीं।
  3. झाड़ू को लिटाकर रखें, खड़ी नहीं; और ऐसी जगह रखें जहाँ वह आने-जाने वालों को सीधे न दिखे, जैसे दरवाज़े के पीछे या अलमारी के कोने में।
  4. रसोई और पूजा-घर में झाड़ू न रखें।
  5. नई झाड़ू का प्रयोग अगले दिन से या दीपावली की सफ़ाई में आरम्भ करें; कई परिवार इसे धनतेरस की रात से ही उपयोग में ले आते हैं। अपनी पारिवारिक रीति मानें।

क्या न करें: प्रचलित लोक-मान्यताएँ

नीचे की बातें शास्त्र-विधान नहीं, बल्कि घर-परिवार में चली आ रही लोक-मान्यताएँ हैं। इनके पीछे का भाव झाड़ू के प्रति आदर और घर की व्यवस्था है।

  • झाड़ू पर पैर न रखें और उसे लाँघें नहीं। लोक-मान्यता में इसे माँ लक्ष्मी का अनादर माना जाता है।
  • झाड़ू को खड़ा करके या उल्टा करके न रखें।
  • धनतेरस और दीपावली के दिन पुरानी झाड़ू फेंकने से बचें; पर्व बीत जाने के बाद किसी उपयुक्त दिन उसे आदर से विदा करें। यह भी लोक-मान्यता है।
  • सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू न लगाने की मान्यता कई परिवारों में है; दीपावली की संध्या पर विशेष रूप से इसका ध्यान रखा जाता है।
  • झाड़ू से किसी पशु या व्यक्ति को मारना या उसे फेंककर देना अनुचित माना जाता है।
  • टूटी झाड़ू को बहुत दिनों तक न रखें; समय पर बदल दें।

झाड़ू के साथ और क्या लें

परम्परागत रूप से झाड़ू के साथ धनिया के बीज, मिट्टी के दीपक, पीतल या स्टील का कोई बर्तन और खील-बताशे लिए जाते हैं। धनिया के बीज पूजा में माँ लक्ष्मी को अर्पित करके बाद में गमले में बोए जाते हैं। सामर्थ्य हो तो चाँदी का सिक्का, अन्यथा एक छोटा-सा दीपक भी उतना ही शुभ है।

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झाड़ू से जुड़ी एक सरल प्रार्थना

नई झाड़ू से पहली बार सफ़ाई करते समय मन में यह भाव रखें: हे माँ लक्ष्मी, इस घर से रोग, कलह और दरिद्रता दूर हों, और यहाँ प्रकाश, परिश्रम और प्रेम का वास हो। किसी विशेष मंत्र की बाध्यता नहीं; चाहें तो माँ लक्ष्मी की आरती या चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदते हैं?

लोक-परम्परा में झाड़ू दरिद्रता और गंदगी को घर से बाहर करने का साधन है, और स्वच्छ घर में माँ लक्ष्मी का वास माना गया है। दीपावली से पहले नई झाड़ू लाना उनके स्वागत की तैयारी का प्रतीक है।

धनतेरस 2026 पर झाड़ू कब खरीदें?

शुक्रवार 6 नवंबर को दिल्ली में 12:04–13:26 का शुभ चौघड़िया श्रेष्ठ है, रात 20:48–22:26 का लाभ चौघड़िया भी शुभ है, पर कई परिवार झाड़ू सूर्यास्त के बाद नहीं खरीदते — अपनी पारिवारिक परम्परा मानें; सम्भव हो तो दिन में ही ले आएँ। 10:42–12:04 का राहुकाल टालें, और ध्यान रखें कि त्रयोदशी 10:31 से आरम्भ होती है।

कितनी झाड़ू खरीदनी चाहिए?

कई परिवार एक या तीन, यानी विषम संख्या में लाते हैं। यह लोक-मान्यता है; एक झाड़ू पूरी तरह पर्याप्त है।

पुरानी झाड़ू का क्या करें?

लोक-मान्यता है कि धनतेरस या दीपावली के दिन पुरानी झाड़ू न फेंकें। पर्व के बाद किसी उपयुक्त दिन उसे आदर से विदा करें या घर के बाहर के काम में लें।

क्या प्लास्टिक की झाड़ू खरीद सकते हैं?

हाँ। परम्परा में सींक या फूल वाली प्राकृतिक झाड़ू अधिक प्रचलित है, पर मूल भाव स्वच्छता का है, सामग्री का नहीं।

संदर्भ

पद्म पुराण (अलक्ष्मी-प्रसंग की परम्परा) · धर्मसिन्धु · आरती संग्रह पंचांग-गणना (नई दिल्ली)

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