दीपावली 2026 — रविवार, 8 नवंबर 2026

Diwali · कार्तिक मास · 28 दिन बाद

दीपावली 2026 कब है?

दीपावली 2026 में रविवार, 8 नवंबर 2026 को है — आज से 28 दिन बाद।

कार्तिक अमावस्या — लक्ष्मी-गणेश पूजन; प्रदोष काल में दीपमालिका। श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति।

दीपावली का महत्व

कार्तिक अमावस्या — लक्ष्मी-गणेश पूजन; प्रदोष काल में दीपमालिका। श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति।

यह पर्व कार्तिक मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।

दीपावली 2026 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय06:38
सूर्यास्त17:31
प्रदोष काल (पूजा)17:31 – 19:55
खरीदारी के शुभ चौघड़ियालाभ 09:21–10:43 · अमृत 10:43–12:04 · शुभ 13:26–14:48 · शुभ 17:31–19:09
अभिजीत मुहूर्त11:42 – 12:26
ब्रह्म मुहूर्त05:02 – 05:50
राहुकाल (टालें)16:09 – 17:31

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।

दीपावली पूजा-विधि

  1. घर की सफाई कर मुख्य द्वार पर रंगोली व तोरण सजाएँ।
  2. प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में लक्ष्मी-गणेश की स्थापना करें।
  3. कलश, अक्षत, कमल-पुष्प, कौड़ी व श्रीयंत्र सहित षोडशोपचार पूजन करें।
  4. 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का जप कर लक्ष्मी-गणेश आरती करें।
  5. पूरे घर में दीपमालिका प्रज्वलित करें तथा बही-खाता व तिजोरी का पूजन करें।

दीपावली पूजा सामग्री

लक्ष्मी-गणेश मूर्ति, कलश, कमल-पुष्प, अक्षत, कौड़ी, श्रीयंत्र, बताशे, खील, दीपक, तेल-बाती, रोली, धूप

दीपावली — क्या करें, क्या न करें

पूजन प्रदोष काल में, स्थिर लग्न में श्रेष्ठ माना गया है; लक्ष्मी-पूजन से पूर्व गणेश-पूजन अनिवार्य है। घर का मुख्य द्वार खुला व दीप-सज्जित रखें, तिजोरी-बही का पूजन करें, और रात्रि में दीप बुझने न दें। इस रात्रि जुआ, मदिरा, कलह तथा किसी का अपमान वर्जित कहा गया है; झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक मानकर इस दिन उसका दान या अनादर नहीं किया जाता। पटाखों में सावधानी रखें — बच्चों, वृद्धों व पशुओं का ध्यान रहे।

पूजा व मंत्र

लक्ष्मी-गणेश की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (108 बार जप)।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।

संबंधित पाठ व पर्व

दीपावली की कथा

दीपावली पर एक नहीं, तीन परम्पराएँ साथ चलती हैं — और तीनों का दीप जलाने का कारण एक ही है। उत्तर भारत में यह वह रात्रि है जब चौदह वर्ष का वनवास व रावण-वध पूरा कर श्रीराम, सीता व लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे; नगरवासियों ने अमावस्या की अँधेरी रात को घी के दीपों से दिन बना दिया। दूसरी परम्परा लक्ष्मी-प्राकट्य की है — समुद्र-मंथन से कार्तिक अमावस्या को माँ लक्ष्मी का प्राकट्य, इसीलिए इस रात्रि प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश का पूजन होता है। तीसरी दक्षिण भारत की है — श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध, जिसकी स्मृति नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग-स्नान से की जाती है। तीनों में सार एक है: अंधकार कितना भी घना हो, एक दीप उसे हरा देता है।

दीपावली — क्षेत्रीय परम्पराएँ

उत्तर भारत में लक्ष्मी-गणेश पूजन व दीपमालिका मुख्य है; बंगाल में इसी अमावस्या को माँ काली की पूजा होती है; दक्षिण भारत में इसे नरक चतुर्दशी (नरकासुर-वध) के रूप में प्रातः तेल-स्नान से मनाया जाता है।

दीपावली — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2025सोमवार, 20 अक्टूबर 2025
2026रविवार, 8 नवंबर 2026
2027शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027
2028मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028
2029सोमवार, 5 नवंबर 2029

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