छोटी दिवाली पर हनुमान पूजा क्यों होती है: 3 कारण और 2026 की विधि

छोटी दिवाली (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) की रात श्री हनुमान जी की पूजा तीन कारणों से होती है: कुछ परम्पराएँ इसी तिथि को उनका जन्मदिवस मानती हैं, यह रात काली चौदस के रूप में नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की रात मानी जाती है, और प्रभु श्री राम के अयोध्या लौटने से जुड़ी स्मृति में उनके परम दूत का सम्मान होता है। 2026 में यह पूजा शनिवार 7 नवंबर की रात है, जब निशीथ काल (नई दिल्ली) 23:38 से 00:31 तक चतुर्दशी में रहेगा।

एक नज़र में

पूजा की रातशनिवार, 7 नवंबर 2026
चतुर्दशी तिथि7 नवंबर 10:48 से 8 नवंबर 11:28 तक
प्रदोष (नई दिल्ली)17:31–20:09
निशीथ काल23:38–00:31
मुख्य हनुमान जयंतीचैत्र पूर्णिमा (अधिकांश भारत में)

सबसे पहले तिथि: 2026 में यह रात 7 नवंबर है

इस वर्ष चतुर्दशी 7 नवंबर को 10:48 पर आरम्भ होकर 8 नवंबर को 11:28 तक है। नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर में है और उसी शाम दीपावली है। पर जिस संध्या और रात में चतुर्दशी है, वह शनिवार 7 नवंबर है, इसलिए श्री हनुमान जी की रात्रि-पूजा, काली चौदस की साधना और चतुर्दशी का दीपदान 7 नवंबर को ही होंगे। संयोग से यह शनिवार है, जो परम्परा में श्री हनुमान जी की उपासना का प्रिय वार माना जाता है।

पहला कारण: कुछ परम्पराओं में यह श्री हनुमान जी की जन्म-तिथि है

श्री हनुमान जी की जन्म-तिथि को लेकर परम्पराओं में दो मत मिलते हैं। उत्तर भारत की कुछ परम्पराएँ, पुराण-वचनों के आधार पर, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनका जन्मदिवस मानती हैं और इसी रात निशीथ-व्यापिनी चतुर्दशी में उनका जन्मोत्सव मनाती हैं। कई स्थानों पर इस दिन उन्हें सिंदूर का चोला, लाल वस्त्र और ध्वजा चढ़ाई जाती है।

दूसरी ओर, भारत के अधिकांश भाग में चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है, और यही सबसे व्यापक रूप से मान्य तिथि है। कुछ विद्वान दोनों को इस तरह जोड़ते हैं कि एक जन्म का उत्सव है और दूसरा विजय-अभिनन्दन का। दोनों परम्पराएँ श्रद्धा की हैं; आप अपने कुल और क्षेत्र की परम्परा मानें।

दूसरा कारण: काली चौदस — नकारात्मकता से रक्षा की रात

गुजरात और पश्चिम भारत में यह रात काली चौदस कहलाती है। यहाँ माँ काली और श्री हनुमान जी की पूजा कर घर से भय, आलस्य और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने की परम्परा है। मान्यता है कि अमावस्या से पहले की यह अंधेरी रात नकारात्मक शक्तियों की सक्रियता की रात है, और श्री हनुमान जी संकटमोचन हैं — इसलिए माँ लक्ष्मी के आगमन से पहले घर की रक्षा और शुद्धि के लिए उनकी शरण ली जाती है।

इसे भय के रूप में नहीं, तैयारी के रूप में देखिए: जैसे अतिथि के आने से पहले घर साफ़ किया जाता है, वैसे ही दीपावली से एक रात पहले मन और घर को साहस, संयम और भक्ति से भर लेना।

तीसरा कारण: प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन की स्मृति

वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में वर्णन है कि लंका-विजय के बाद अयोध्या लौटते समय प्रभु श्री राम ने श्री हनुमान जी को आगे भेजा, ताकि वे नन्दिग्राम में भरत जी को उनके लौटने का समाचार दें। दीपावली की लोक-परम्परा प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन से जुड़ी है। मान्यता है कि उस आगमन से पहले शुभ समाचार लाने वाले दूत का स्मरण दीपावली की पूर्व-रात्रि में करना उचित है — श्री राम से पहले उनके परम भक्त का सम्मान।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

मन के समान गति और वायु के समान वेग वाले, इन्द्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर-सेना के प्रमुख, प्रभु श्री राम के दूत श्री हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।

— श्री रामरक्षा स्तोत्र

7 नवंबर 2026 की रात पूजा की सरल विधि

  1. संध्या को स्नान कर स्वच्छ, सम्भव हो तो लाल या केसरिया वस्त्र पहनें। प्रदोष काल (नई दिल्ली 17:31–20:09) में घर के द्वार और पूजा-स्थान पर दीपक जलाएँ।
  2. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर श्री हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा रखें, साथ में प्रभु श्री राम का चित्र भी हो तो अच्छा।
  3. पहले श्री गणेश जी का स्मरण करें, फिर प्रभु श्री राम का नाम लें, तब श्री हनुमान जी का पूजन आरम्भ करें।
  4. चमेली के तेल में मिला सिंदूर अर्पित करें (प्रतिमा हो तो चोला), फिर लाल फूल, जनेऊ, अक्षत और धूप-दीप चढ़ाएँ।
  5. भोग में गुड़-चना, बूंदी या बेसन के लड्डू रखें।
  6. निशीथ काल (23:38–00:31) में या अपनी सुविधा से हनुमान चालीसा, फिर बजरंग बाण या हनुमान अष्टक का पाठ करें।
  7. अंत में आरती कीजै हनुमान लला की गाएँ, प्रसाद बाँटें और घर के सभी सदस्यों की कुशलता की प्रार्थना करें।

क्या चढ़ाएँ और क्या पढ़ें

  • सिंदूर और चमेली का तेल — परम्परा में श्री हनुमान जी को सबसे प्रिय माना जाता है।
  • लाल फूल — गुड़हल या लाल गुलाब; फूलों की माला।
  • गुड़-चना और बूंदी — सरल, सात्त्विक भोग।
  • पाठ: हनुमान चालीसा (कम से कम एक या सात बार), बजरंग बाण, संकटमोचन हनुमान अष्टक।
  • दीपक: सरसों या चमेली के तेल का दीपक श्री हनुमान जी के सामने।

हनुमान चालीसा या राम नाम का जप गिनती के साथ करना चाहें, तो जप माला आपका साथ देगी। जप आरम्भ करें

इन भूलों से बचें

  • चतुर्दशी 7 नवंबर 10:48 से है; उससे पहले की सुबह त्रयोदशी है, और राहुकाल 09:21–10:42 भी उसी समय है। विशेष पूजा संध्या-रात्रि में ही रखें।
  • पूजा में मांस, मदिरा या तामसिक भोजन से दूर रहें; इस रात संयम ही साधना है।
  • बजरंग बाण को किसी के अहित की भावना से न पढ़ें; यह रक्षा और साहस का पाठ है।
  • सिंदूर-तेल का दीपक और धूप पर्दों से दूर रखें; रात में जलता दीपक अकेला न छोड़ें।
  • डर या अंधविश्वास फैलाने वाली बातों पर ध्यान न दें; श्री हनुमान जी की उपासना निर्भयता देती है, भय नहीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा क्यों करते हैं?

कुछ परम्पराएँ इस तिथि को श्री हनुमान जी का जन्मदिवस मानती हैं; काली चौदस के रूप में यह नकारात्मकता से रक्षा की रात मानी जाती है; और प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन से पहले उनके दूत का स्मरण किया जाता है।

2026 में छोटी दिवाली की हनुमान पूजा किस दिन है?

शनिवार, 7 नवंबर 2026 की रात। चतुर्दशी 7 नवंबर 10:48 से आरम्भ होती है और नई दिल्ली में निशीथ काल 23:38–00:31 चतुर्दशी में है।

क्या कार्तिक चतुर्दशी को हनुमान जयंती होती है?

उत्तर भारत की कुछ परम्पराओं में हाँ। पर देश के अधिकांश भाग में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो सबसे व्यापक मान्य तिथि है।

हनुमान जी को क्या चढ़ाना चाहिए?

चमेली के तेल में सिंदूर, लाल फूल, गुड़-चना या बूंदी का भोग और सरसों या चमेली के तेल का दीपक। साथ में हनुमान चालीसा का पाठ।

क्या रात 12 बजे ही पूजा करना ज़रूरी है?

नहीं। निशीथ काल साधना करने वालों के लिए विशेष है, पर सामान्य परिवार प्रदोष काल (नई दिल्ली 17:31–20:09) में भी पूरी श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं।

संदर्भ

वाल्मीकि रामायण (युद्धकाण्ड) · श्री रामरक्षा स्तोत्र · निर्णयसिन्धु · आरती संग्रह पंचांग-गणना (नई दिल्ली)

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