गोपाल गोविन्द कृष्ण सहस्रनाम बीज

भगवान कृष्ण · Krishna · मंत्र

गोपाल गोविन्द कृष्ण सहस्रनाम बीज — भगवान कृष्ण

गोपाल गोविन्द कृष्ण सहस्रनाम बीज के बोल

ॐ कृष्णाय नमः। ॐ वासुदेवाय नमः।
ॐ देवकीसुताय नमः। ॐ गोपालाय नमः।
ॐ नन्दनन्दनाय नमः। ॐ मुरलीधराय नमः।
ॐ मदनमोहनाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः।
ॐ माधवाय नमः। ॐ यदुनाथाय नमः।
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः। ॐ जनार्दनाय नमः।
ॐ मुकुन्दाय नमः। ॐ मुरारये नमः।
ॐ वनमालिने नमः। ॐ पीताम्बराय नमः।
ॐ यशोदासुताय नमः। ॐ राधावल्लभाय नमः।
ॐ कालिन्दीरमणाय नमः। ॐ गोकुलनायकाय नमः।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

— स्रोत: भागवत पुराण — कृष्ण नामाष्टोत्तर परम्परा

अगला संबंधित व्रत

भगवान कृष्ण से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान कृष्ण मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान कृष्ण के अन्य पाठ