मेधासूक्त
माँ सरस्वती · Saraswati · मंत्र
मेधासूक्त के बोल
ॐ मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्निश्च वायुश्च।
मेधामिन्द्रश्च वाचस्पतिर्मेधां धाता ददातु मे॥
मेधां मे अश्विनावुभावादित्याश्च सरस्वती।
मेधां महेन्द्रः कल्याणीं मेधां देवी ददातु मे॥
सरस्वत्यभिनो देवी वाजेभिर्वाजिनीवती।
यज्ञं वष्टु धियावसुः॥
इमा नू ऐं सरस्वतीमुपस्तुतिमिशमहे।
स नः प्रयत्स्व वाजेषु यामक्षेत्रे सचाभुवम्॥
यास्ते सरस्वते धारा उपक्षरन्ति धेनवः।
तासामपिक्षियेम हि॥
ॐ मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्निश्च वायुश्च।
मेधामिन्द्रश्च वाचस्पतिर्मेधां धाता ददातु मे॥
— स्रोत: तैत्तिरीय आरण्यक — मेधासूक्त
माँ सरस्वती मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।
माला: **स्फटिक अथवा श्वेत चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।