सरस्वती स्तोत्र (महाभारत)

माँ सरस्वती · Saraswati · स्तोत्र

सरस्वती स्तोत्र (महाभारत) — माँ सरस्वती

सरस्वती स्तोत्र (महाभारत) के बोल

नमो सरस्वती देव्यै ब्राह्म्यै वाण्यै नमो नमः।
विशुद्धज्ञानरूपायै वाग्देव्यै नित्यशः नमः॥

नमामि सततं देवीं वाग्रूपां ब्रह्मचारिणीम्।
या पठेत् श्रृणुयात् नित्यं विद्यावान् जायते ध्रुवम्॥

शारदा शारदाम्भोज वदना वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात्॥

पाटला पाटलासक्ता पाटला पटलप्रिया।
पट्टिका पट्टिकोद्भूता पटुका पटुकप्रिया॥

वेदपुत्री महेश्वरी शास्त्रव्याकरणप्रिया।
विद्यावती विद्यरूपे सरस्वत्यै नमो नमः॥

— स्रोत: महाभारत — सरस्वती स्तव परम्परा

माँ सरस्वती मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **स्फटिक अथवा श्वेत चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

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