श्री कृष्ण / राधा-कृष्ण मन्त्र-संग्रह

भगवान कृष्ण · Krishna · मंत्र

श्री कृष्ण / राधा-कृष्ण मन्त्र-संग्रह — भगवान कृष्ण

श्री कृष्ण / राधा-कृष्ण मन्त्र-संग्रह के बोल

॥ श्री कृष्ण / राधा-कृष्ण मन्त्र-संग्रह ॥

【 कृष्ण बीज मन्त्र 】
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः॥

【 अष्टादशाक्षर गोपाल मन्त्र (सबसे प्रसिद्ध) 】
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा॥

【 कृष्ण गायत्री मन्त्र 】
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥

【 कृष्ण वन्दन श्लोक 】
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

【 भय-नाशक कृष्ण मन्त्र 】
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

【 राधा-कृष्ण युगल मन्त्र 】
ॐ ह्रीं राधाकृष्णाभ्यां नमः॥
ॐ श्रीं राधिकायै नमः॥
राधाकृष्ण शरणं मम॥

अगला संबंधित व्रत

भगवान कृष्ण से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान कृष्ण मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान कृष्ण के अन्य पाठ