श्री विष्णु मन्त्र-संग्रह (द्वादशाक्षर + अष्टाक्षर + ध्यान श्लोक + 24 नाम)

भगवान विष्णु · Vishnu · मंत्र

श्री विष्णु मन्त्र-संग्रह (द्वादशाक्षर + अष्टाक्षर + ध्यान श्लोक + 24 नाम) — भगवान विष्णु

श्री विष्णु मन्त्र-संग्रह (द्वादशाक्षर + अष्टाक्षर + ध्यान श्लोक + 24 नाम) के बोल

॥ श्री विष्णु मन्त्र-संग्रह ॥

【 द्वादशाक्षर महामन्त्र (मूल मन्त्र) 】
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

【 अष्टाक्षर मन्त्र 】
ॐ नमो नारायणाय॥

【 विष्णु ध्यान श्लोक 】
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

【 विष्णु स्मरण श्लोक 】
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात्।
विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे॥

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

【 विष्णु चतुर्विंशति नाम (24 नाम) 】
ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
ॐ गोविन्दाय नमः। ॐ विष्णवे नमः। ॐ मधुसूदनाय नमः।
ॐ त्रिविक्रमाय नमः। ॐ वामनाय नमः। ॐ श्रीधराय नमः।
ॐ हृषीकेशाय नमः। ॐ पद्मनाभाय नमः। ॐ दामोदराय नमः।
ॐ सङ्कर्षणाय नमः। ॐ वासुदेवाय नमः। ॐ प्रद्युम्नाय नमः।
ॐ अनिरुद्धाय नमः। ॐ पुरुषोत्तमाय नमः। ॐ अधोक्षजाय नमः।
ॐ नारसिंहाय नमः। ॐ अच्युताय नमः। ॐ जनार्दनाय नमः।
ॐ उपेन्द्राय नमः। ॐ हरये नमः। ॐ श्रीकृष्णाय नमः॥

श्री विष्णु मन्त्र-संग्रह (द्वादशाक्षर + अष्टाक्षर + ध्यान श्लोक + 24 नाम) — कब पढ़ें

भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

गुरु की वर्तमान स्थिति

गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

अगला संबंधित व्रत

भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान विष्णु मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान विष्णु की आराधना का वार गुरुवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

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