नवरात्रि दिन ३ — माँ चन्द्रघण्टा

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · मस्तक पर घण्टे के आकार का अर्धचन्द्र; दस भुजाएँ, सिंह/बाघ पर सवार; युद्ध-मुद्रा में शान्त-सौम्य।

ध्यान

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

अर्थ: श्रेष्ठ वाहन (सिंह/बाघ) पर आरूढ़, प्रचण्ड अस्त्रों से युक्त, 'चन्द्रघण्टा' नाम से विख्यात देवी मुझ पर कृपा करें।

मन्त्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

प्रणाम: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आज का श्लोक — सप्तशती ११.१२

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: शरणागत दीन-दुखियों की रक्षा में तत्पर, सबकी पीड़ा हरने वाली नारायणी देवि! आपको नमस्कार।

आज की पूजा

  • रंग — लाल
  • नैवेद्य — दूध या दूध से बनी मिठाई/खीर
  • पुष्प — कमल/लाल पुष्प
  • विधि — नित्य पूजा; पूजा में घण्टी-वादन।
  • सप्तशती पाठ — अध्याय ४

नाम-क्रम व स्रोत

  • नाम-क्रम — चन्द्रघण्टा (नवदुर्गा क्रम ३; देवी कवच श्लोक ३–५)
  • मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
  • 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।

माँ चन्द्रघण्टा की पूजा का क्रम

  1. स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
  2. ध्यान श्लोक — माँ चन्द्रघण्टा के स्वरूप का स्मरण
  3. मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
  4. स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
  5. दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय ४
  6. भोग — दूध या दूध से बनी मिठाई/खीर; वस्त्र का रंग लाल
  7. आरती — जय अम्बे गौरी
  8. क्षमा प्रार्थना

आज की आरती व पाठ — माँ चन्द्रघण्टा

यह पाठ कैसे जाँचा गया

तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।

  • दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
  • देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
  • नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग

पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।

आगे-पीछे

इस दिन का पाठ