नवरात्रि दिन ४ — माँ कूष्माण्डा
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · मन्द हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली; अष्टभुजा (कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र, गदा, जपमाला); सिंहवाहिनी; सूर्यमण्डल में निवास।
ध्यान
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
अर्थ: कर-कमलों में (अमृत/सुरा से) पूर्ण कलश और रक्त-पूर्ण कलश धारण करने वाली कूष्माण्डा देवी मेरे लिए शुभदायिनी हों।
मन्त्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
प्रणाम: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का श्लोक — सप्तशती ४.१७
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥
अर्थ: हे दुर्गे! स्मरण करने पर आप सबका भय हरती हैं और शुभ बुद्धि देती हैं; दरिद्रता-दुःख-भय हरने वाली आपके सिवा कौन है?
आज की पूजा
- रंग — गहरा नीला
- नैवेद्य — मालपुआ
- पुष्प — लाल पुष्प (गुड़हल)
- विधि —
- सप्तशती पाठ — अध्याय ५–६
नाम-क्रम व स्रोत
- नाम-क्रम — कूष्माण्डा (नवदुर्गा क्रम ४; देवी कवच श्लोक ३–५)
- मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
- 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।
माँ कूष्माण्डा की पूजा का क्रम
- स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
- ध्यान श्लोक — माँ कूष्माण्डा के स्वरूप का स्मरण
- मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
- स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
- दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय ५–६
- भोग — मालपुआ; वस्त्र का रंग गहरा नीला
- आरती — जय अम्बे गौरी
- क्षमा प्रार्थना
आज की आरती व पाठ — माँ कूष्माण्डा
- देवी सूक्त — स्तोत्र
- दुर्गा गायत्री मन्त्र — मन्त्र
- जय अम्बे गौरी — आरती
- श्री दुर्गा चालीसा — चालीसा
- नवार्ण मन्त्र — मन्त्र
- नवदुर्गा स्तोत्र — स्तोत्र
यह पाठ कैसे जाँचा गया
तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।
- दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
- देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
- नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग
पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।
आगे-पीछे
इस दिन का पाठ
- नवार्ण मन्त्र — नित्य जप
- श्री दुर्गा चालीसा
- जय अम्बे गौरी आरती
- नवदुर्गा स्तोत्र — नौ स्वरूपों के ध्यान