नवरात्रि दिन ५ — माँ स्कन्दमाता

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 · भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) की माता; गोद में बाल स्कन्द; चतुर्भुजा, दो हाथों में कमल; कमलासना (पद्मासना), सिंहवाहिनी।

ध्यान

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

अर्थ: सदा सिंहासन पर विराजमान, दोनों हाथों में कमल धारण करने वाली यशस्विनी स्कन्दमाता सदा शुभ देने वाली हों।

मन्त्र

ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥

प्रणाम: ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आज का श्लोक — सप्तशती ११.२४

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी, सर्वशक्तिमयी दुर्गे! भयों से हमारी रक्षा करो।

आज की पूजा

  • रंग — पीला
  • नैवेद्य — केला
  • पुष्प — पीले पुष्प
  • विधि —
  • सप्तशती पाठ — अध्याय ७–८

नाम-क्रम व स्रोत

  • नाम-क्रम — स्कन्दमाता (नवदुर्गा क्रम ५; देवी कवच श्लोक ३–५)
  • मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
  • 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।

माँ स्कन्दमाता की पूजा का क्रम

  1. स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
  2. ध्यान श्लोक — माँ स्कन्दमाता के स्वरूप का स्मरण
  3. मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥
  4. स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
  5. दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय ७–८
  6. भोग — केला; वस्त्र का रंग पीला
  7. आरती — जय अम्बे गौरी
  8. क्षमा प्रार्थना

आज की आरती व पाठ — माँ स्कन्दमाता

यह पाठ कैसे जाँचा गया

तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।

  • दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
  • देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
  • नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग

पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।

आगे-पीछे

इस दिन का पाठ