नवरात्रि दिन ६ — माँ कात्यायनी
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 · महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट — महिषासुर-मर्दिनी; चतुर्भुजा (तलवार, कमल, अभय, वर); सिंहवाहिनी। ब्रज की गोपियों ने कृष्ण-प्राप्ति हेतु इनकी पूजा की।
ध्यान
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
अर्थ: चमकती चन्द्रहास तलवार हाथ में लिए, श्रेष्ठ सिंह पर सवार, दानवों का नाश करने वाली कात्यायनी देवी शुभ प्रदान करें।
मन्त्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
प्रणाम: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का श्लोक — सप्तशती ११.२५
एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रयभूषितम्।
पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायनि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: तीन नेत्रों से सुशोभित आपका यह सौम्य मुख सब भयों से हमारी रक्षा करे; हे कात्यायनी! आपको नमस्कार।
आज की पूजा
- रंग — हरा
- नैवेद्य — शहद
- पुष्प — लाल/गेंदा
- विधि —
- सप्तशती पाठ — अध्याय ९–१०
नाम-क्रम व स्रोत
- नाम-क्रम — कात्यायनी (नवदुर्गा क्रम ६; देवी कवच श्लोक ३–५)
- मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
- 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।
माँ कात्यायनी की पूजा का क्रम
- स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
- ध्यान श्लोक — माँ कात्यायनी के स्वरूप का स्मरण
- मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
- स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
- दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय ९–१०
- भोग — शहद; वस्त्र का रंग हरा
- आरती — जय अम्बे गौरी
- क्षमा प्रार्थना
आज की आरती व पाठ — माँ कात्यायनी
- महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र — स्तोत्र
- महिषासुरमर्दिनी मन्त्र — मन्त्र
- जय अम्बे गौरी — आरती
- श्री दुर्गा चालीसा — चालीसा
- नवार्ण मन्त्र — मन्त्र
- नवदुर्गा स्तोत्र — स्तोत्र
यह पाठ कैसे जाँचा गया
तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।
- दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
- देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
- नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग
पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।
आगे-पीछे
इस दिन का पाठ
- नवार्ण मन्त्र — नित्य जप
- श्री दुर्गा चालीसा
- जय अम्बे गौरी आरती
- नवदुर्गा स्तोत्र — नौ स्वरूपों के ध्यान