नवरात्रि दिन ७ — माँ कालरात्रि

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · घोर कृष्णवर्णा, बिखरे केश, गले में विद्युत-सी माला, तीन नेत्र, गर्दभ-वाहन; भयंकर रूप पर सदा शुभ फल देने वाली — इसलिए 'शुभंकरी'।

ध्यान

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

अर्थ: एक वेणी वाली, कानों में जपाकुसुम, दिगम्बरा, गधे पर सवार, लम्बे ओठ व कर्णफूल वाली, तेल-लिप्त शरीर, बाएँ पैर में चमकते लोहे के काँटेदार आभूषण, ऊँचे ध्वज-से केश वाली, कृष्णवर्णा, भयंकर (शत्रुओं के लिए) कालरात्रि।

मन्त्र

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

प्रणाम: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आज का श्लोक — सप्तशती ११.२६

ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम्।
त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: ज्वालाओं से विकराल, अत्यन्त उग्र, सब असुरों का संहार करने वाला आपका त्रिशूल हमें भय से बचाए; हे भद्रकाली! आपको नमस्कार।

आज की पूजा

  • रंग — स्लेटी
  • नैवेद्य — गुड़ (या गुड़ से बना भोग)
  • पुष्प — रात की रानी/नीले पुष्प (उपलब्धता अनुसार लाल गुड़हल)
  • विधि — नित्य पूजा; कई परम्पराओं में महासप्तमी से सप्तशती पाठ का विशेष आरम्भ।
  • सप्तशती पाठ — अध्याय ११

नाम-क्रम व स्रोत

  • नाम-क्रम — कालरात्रि (नवदुर्गा क्रम ७; देवी कवच श्लोक ३–५)
  • मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
  • 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।

माँ कालरात्रि की पूजा का क्रम

  1. स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
  2. ध्यान श्लोक — माँ कालरात्रि के स्वरूप का स्मरण
  3. मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
  4. स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
  5. दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय ११
  6. भोग — गुड़ (या गुड़ से बना भोग); वस्त्र का रंग स्लेटी
  7. आरती — जय अम्बे गौरी
  8. क्षमा प्रार्थना

आज की आरती व पाठ — माँ कालरात्रि

यह पाठ कैसे जाँचा गया

तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।

  • दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
  • देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
  • नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग

पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।

आगे-पीछे

इस दिन का पाठ