नवरात्रि दिन ९ — माँ सिद्धिदात्री

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · सब सिद्धियाँ (अणिमा आदि) देने वाली; कमलासना/सिंहवाहिनी, चतुर्भुजा (चक्र, गदा, शंख, कमल)। शिव ने इनकी कृपा से सिद्धियाँ पाईं (अर्धनारीश्वर)।

ध्यान

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

अर्थ: सिद्ध, गन्धर्व, यक्ष, असुर और देवताओं द्वारा सदा सेवित सिद्धिदात्री देवी मुझे सिद्धि देने वाली हों।

मन्त्र

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

प्रणाम: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥

स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आज का श्लोक — सप्तशती १२.१३

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥

अर्थ: (देवी का वचन) मेरी कृपा से मनुष्य सब बाधाओं से मुक्त होकर धन-धान्य और सन्तान से युक्त होगा — इसमें संशय नहीं।

आज की पूजा

  • रंग — मोरपंखी हरा
  • नैवेद्य — तिल / हलवा-पूरी-चना (कन्या-भोज)
  • पुष्प — चम्पा/कमल
  • विधि — अष्टमी अथवा नवमी (कुल-परम्परा अनुसार) — कन्या पूजन, हवन, पूर्णाहुति।
  • सप्तशती पाठ — देवीसूक्त + क्षमा प्रार्थना + (वैकल्पिक) सम्पूर्ण सप्तश्लोकी व हवन

नाम-क्रम व स्रोत

  • नाम-क्रम — सिद्धिदात्री (नवदुर्गा क्रम ९; देवी कवच श्लोक ३–५)
  • मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
  • 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।

माँ सिद्धिदात्री की पूजा का क्रम

  1. स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
  2. ध्यान श्लोक — माँ सिद्धिदात्री के स्वरूप का स्मरण
  3. मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
  4. स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
  5. दुर्गा सप्तशती पाठ — देवीसूक्त + क्षमा प्रार्थना + (वैकल्पिक) सम्पूर्ण सप्तश्लोकी व हवन
  6. भोग — तिल / हलवा-पूरी-चना (कन्या-भोज); वस्त्र का रंग मोरपंखी हरा
  7. आरती — जय अम्बे गौरी
  8. क्षमा प्रार्थना

इस दिन की तिथि

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 — दुर्गाष्टमी (उदया अष्टमी) — कन्या-पूजन, सन्धि-पूजा; दोपहर से नवमी भी — अष्टमी-नवमी एक ही दिन। स्थानीय सूर्योदय से समय कुछ बदल सकता है।

आज की आरती व पाठ — माँ सिद्धिदात्री

यह पाठ कैसे जाँचा गया

तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।

  • दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
  • देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
  • नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग

पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।

आगे-पीछे

इस दिन का पाठ