नवरात्रि दिन ८ — माँ महागौरी
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · अत्यन्त गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र-आभूषण; वृषभ-वाहन; चतुर्भुजा (त्रिशूल, डमरू, अभय, वर)। तप से श्याम हुई देह को शिव ने गंगाजल से गौर किया।
ध्यान
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
अर्थ: श्वेत वृषभ पर आरूढ़, श्वेत वस्त्रधारी, पवित्र, महादेव को आनन्द देने वाली महागौरी शुभ प्रदान करें।
मन्त्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
प्रणाम: ॐ देवी महागौर्यै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का श्लोक — सप्तशती ११.१०
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: सब मंगलों की मंगलरूपा, कल्याणी, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली, शरण्या, त्र्यम्बका गौरी नारायणी! आपको नमस्कार।
आज की पूजा
- रंग — बैंगनी
- नैवेद्य — नारियल
- पुष्प — मोगरा/सफेद पुष्प
- विधि — महागौरी पूजा दिन-क्रम के आठवें दिन। कन्या-पूजन तथा सन्धि-पूजा तिथि के अनुसार होते हैं — और तिथि-वृद्धि या क्षय होने पर ये दोनों अलग-अलग दिन पड़ सकते हैं; ऊपर दी गई तिथियाँ पञ्चाङ्ग से हैं।
- सप्तशती पाठ — अध्याय १२–१३
नाम-क्रम व स्रोत
- नाम-क्रम — महागौरी (नवदुर्गा क्रम ८; देवी कवच श्लोक ३–५)
- मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
- 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।
माँ महागौरी की पूजा का क्रम
- स्नान के बाद दीप जलाकर संकल्प
- ध्यान श्लोक — माँ महागौरी के स्वरूप का स्मरण
- मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
- स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
- दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय १२–१३
- भोग — नारियल; वस्त्र का रंग बैंगनी
- आरती — जय अम्बे गौरी
- क्षमा प्रार्थना
इस दिन की तिथि
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 — महागौरी पूजन · अष्टमी तिथि आज दिन में आरम्भ — व्रत-पूजन कल उदया तिथि में। स्थानीय सूर्योदय से समय कुछ बदल सकता है।
आज की आरती व पाठ — माँ महागौरी
- दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम — स्तोत्र
- दुर्गा अष्टमी — तिथि व विधि — पर्व
- दुर्गाष्टमी व्रत — व्रत
- जय अम्बे गौरी — आरती
- श्री दुर्गा चालीसा — चालीसा
- नवार्ण मन्त्र — मन्त्र
- नवदुर्गा स्तोत्र — स्तोत्र
यह पाठ कैसे जाँचा गया
तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।
- दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
- देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
- नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग
पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।
आगे-पीछे
इस दिन का पाठ
- नवार्ण मन्त्र — नित्य जप
- श्री दुर्गा चालीसा
- जय अम्बे गौरी आरती
- नवदुर्गा स्तोत्र — नौ स्वरूपों के ध्यान