बंदौं रघुपति करुना-निधान

भगवान राम · Ram · स्तोत्र

बंदौं रघुपति करुना-निधान — भगवान राम

बंदौं रघुपति करुना-निधान के बोल

बंदौं रघुपति करुना-निधान। जाते छूटे भव-भेद ग्यान॥ १॥
रघुबंस-कुमुद-सुखप्रद निसेस। सेवत पद-पंकज अज-महेस॥ २॥
निज भक्त-हृदय पाथोज-भृंग। लावन्यबपुष अगनित अनंग॥ ३॥
अति प्रबल मोह-तम-मारतंड। अग्यान-गहन-पावक-प्रचंड॥ ४॥
अभिमान-सिंधु-कुम्भज उदार। सुररंजन, भंजन भूमिभार॥ ५॥
रागादि-सर्पगन-पन्नगारि। कंदर्प-नाग-मृगपति, मुरारि॥ ६॥
भव-जलधि-पोत चरनारबिंद। जानकी-रवन आनंद-कंद॥ ७॥
हनुमंत-प्रेम-बापी-मराल। निष्काम कामधुक गो दयाल॥ ८॥
त्रैलोक-तिलक, गुनगहन राम। कह तुलसिदास बिश्राम-धाम॥ ९॥

अगला संबंधित व्रत

भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान राम मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान राम के अन्य पाठ