श्री रामाष्टकम्

भगवान राम · Ram · स्तोत्र

श्री रामाष्टकम् — भगवान राम

श्री रामाष्टकम् के बोल

भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम्।
स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव राममद्वयम्॥
जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशनम्।
स्वभक्तभीतिभंजनं भजेऽहमद्वयं हरिम्॥

निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम्।
समं शिवं निरंजनं भजामि रामसुन्दरम्॥
सुतेजसं सुदुर्जयं सुशीलसुन्दरप्रभुम्।
सदा कृपालु सुन्दरं भजामहे रघूत्तमम्॥

सुनाम रूप रामेति भवबन्धैकमोचकम्।
सुनिर्मलं सदानन्दं भजे राजीवलोचनम्॥
सदा सुखावहं शुभं सुसेवकार्तिनाशनम्।
सुरासुरादिनायकं भजामहे जगत्पतिम्॥

अनन्तमद्वयं हरिं भवाम्बुधेः पारं पतिम्।
समस्तदुःखनाशकं भजामहे जगद्गुरुम्॥
निशाचरादिनाशकं सुधार्मिकं सुशासनम्।
स्वभक्तपापनाशनं भजे नरोत्तमं हरिम्॥

— स्रोत: परम्परागत (Traditional)

अगला संबंधित व्रत

भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान राम मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान राम के अन्य पाठ