उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्

भगवान राम · Ram · स्तोत्र

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम् — भगवान राम

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम् के बोल

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥

— स्रोत: गीताप्रेस, आरती-संग्रह, पृष्ठ 25

अगला संबंधित व्रत

भगवान राम से जुड़ा अगला व्रत — कृष्ण पक्ष एकादशी, गुरुवार, 5 नवंबर (11 दिन बाद)।

भगवान राम मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान राम के अन्य पाठ