नवरात्रि दिन १ — माँ शैलपुत्री
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · पर्वतराज हिमालय की पुत्री (पूर्वजन्म में सती); वृषभ पर सवार, दाएँ हाथ में त्रिशूल, बाएँ में कमल, मस्तक पर अर्धचन्द्र।
ध्यान
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
अर्थ: मनोवांछित लाभ के लिए मैं मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण करने वाली, वृषभ पर सवार, त्रिशूलधारी, यशस्विनी शैलपुत्री की वन्दना करता हूँ।
मन्त्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
प्रणाम: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। पुष्पं समर्पयामि, नमस्करोमि॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज का श्लोक — सप्तशती १.५५–५६
ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥
अर्थ: वे भगवती महामाया ज्ञानियों के चित्त को भी बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं — अतः उन्हीं की शरण से मोह छूटता है।
आज की पूजा
- रंग — नारंगी
- नैवेद्य — गाय का शुद्ध घी (या घी से बना भोग)
- पुष्प — सफेद/लाल पुष्प (गुड़हल, कनेर)
- विधि — घटस्थापना + संकल्प + नित्य पूजा क्रम।
- सप्तशती पाठ — अध्याय १
नाम-क्रम व स्रोत
- नाम-क्रम — शैलपुत्री (नवदुर्गा क्रम १; देवी कवच श्लोक ३–५)
- मूल — ध्यान-श्लोक: नवदुर्गा पूजा-परम्परा; नाम-क्रम: देवी कवच; श्लोक: दुर्गा सप्तशती (गीताप्रेस क्रमांक)
- 'या देवी … माँ X रूपेण संस्थिता' स्तुति लोक-प्रचलित रूपान्तर है (मूल सप्तशती में नहीं)। नैवेद्य/पुष्प/रंग लोक-परम्परा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं। स्रोत: HinduLab, Dev Aastha (Drik Panchang पद्धति)।
माँ शैलपुत्री की पूजा का क्रम
- शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना), अखण्ड ज्योति व संकल्प
- ध्यान श्लोक — माँ शैलपुत्री के स्वरूप का स्मरण
- मूल मन्त्र का १०८ जप — ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
- स्तुति — या देवी सर्वभूतेषु…
- दुर्गा सप्तशती पाठ — अध्याय १
- भोग — गाय का शुद्ध घी (या घी से बना भोग); वस्त्र का रंग नारंगी
- आरती — जय अम्बे गौरी
- क्षमा प्रार्थना
आज की आरती व पाठ — माँ शैलपुत्री
- आरती कीजै शैलसुता की — आरती
- पार्वती माता की आरती — आरती
- जय अम्बे गौरी — आरती
- श्री दुर्गा चालीसा — चालीसा
- नवार्ण मन्त्र — मन्त्र
- नवदुर्गा स्तोत्र — स्तोत्र
यह पाठ कैसे जाँचा गया
तीन स्रोतों से मिलाया: सप्तशती का मूल पाठ (श्लोक-क्रमांक), देवी कवच का नाम-क्रम, और नवदुर्गा की प्रचलित पूजा-पद्धति। भोग सब स्रोतों में एक-से हैं; पुष्प व रंग लोक-परम्परा हैं और क्षेत्र अनुसार बदलते हैं।
- दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण ८१–९३) — श्लोक-पाठ व क्रमांक
- देवी कवच, श्लोक ३–५ — नवदुर्गा का नाम-क्रम
- नवदुर्गा पूजा-पद्धति — ध्यान, मन्त्र, स्वरूप, भोग
पारम्परिक सप्त-दिवसीय पाठ-विभाग (१ | २–३ | ४ | ५–८ | ९–१० | ११ | १२–१३) को नौ दिनों में बाँटा गया है — कोई अध्याय बीच में नहीं तोड़ा जाता। अपनी परम्परा का क्रम हो तो वही करें।
आगे-पीछे
इस दिन का पाठ
- नवार्ण मन्त्र — नित्य जप
- श्री दुर्गा चालीसा
- जय अम्बे गौरी आरती
- नवदुर्गा स्तोत्र — नौ स्वरूपों के ध्यान